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पित्र दोष (02) - कुंडली के विभिन्न घरों में बनने वाले पित्र दोष के अशुभ प्रभावों के बारे में - Saral Jyotish Upay
 
 
कुंडली के सातवें घर का पितृ दोष :
कुंडली के सातवें घर में बनने वाला पितृ दोष जातक के वैवाहिक जीवन को बहुत कष्टमय बना सकता है तथा इस दोष के प्रभाव में आने वाले जातकों को अपने वैवाहिक जीवन में तर्क वितर्क, अशांति, झगड़े, हिंसा, अलगाव तथा तलाक जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है तथा यह सारी समस्याएं उस स्थिति में और भी गंभीर हो सकती हैं जब ऐसा पितृ दोष कुंडली के सातवें घर में सूर्य तथा अशुभ मंगल के स्थित होने से बन रहा हो क्योंकि कुंडली के सातवें घर में स्थित ऐसा अशुभ मंगल कुंडली में मांगलिक दोष भी बना सकता है जिसके कारण मांगलिक दोष तथा पितृ दोष के संयुक्त प्रभाव में आने वाले जातक को अपने वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार के कष्ट उठाने पड़ सकते हैं। कुछ स्थितियों में तो इस प्रकार के पितृ दोष तथा मांगलिक दोष का संयुक्त प्रभाव गंभीर शारीरिक हिंसा को जन्म दे सकता है जिसके चलते क्रोध में आने के कारण शुरु हुई हिंसा के चलते जातक अपनी पत्नि को गंभीर रूप से घायल कर सकता है अथवा उसकी हत्या भी कर सकता है जबकि इस प्रकार के पितृ दोष से पीड़ित कुछ अन्य जातकों के एक से अधिक विवाह भंग हो सकते हैं अथवा इनकी पत्नियां किसी रोग या दुर्घटना के कारण मर सकतीं हैं। इस प्रकार के पितृ दोष तथा मांगलिक दोष का संयुक्त प्रभाव जातक के वैवाहिक जीवन को बहुत कष्टमय अथवा नर्क समान बना सकता है। कुंडली के सातवें घर का पितृ दोष जातक के व्यवसायिक क्षेत्र पर भी अशुभ प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते ऐसे जातकों को अपने व्यवसाय में बार बार हानि उठानी पड़ सकती है तथा इनमें से कुछ जातकों को अपने व्यवसायिक क्षेत्र से जुड़ी किसी समस्या के कारण अपयश अथवा बदनामी और किसी मुकद्दमें का सामना भी करना पड़ सकता है। कुंडली के सातवें घर में बनने वाले पितृ दोष के अशुभ प्रभाव के कारण जातक को किसी प्रकार का गुप्त रोग भी हो सकता है तथा इस दोष के बहुत प्रबल होने की स्थिति में ऐसा गुप्त रोग जातक के लिए जानलेवा भी सिद्ध हो सकता है इसलिए इस प्रकार के जातकों को शारीरिक संबंध बनाते समय बहुत सावधानी का प्रयोग करना चाहिए। इसके अतिरिक्त कुंडली के सातवें घर का पितृ दोष जातक को संतान पैदा करने संबंधी समस्याओं से भी पीड़ित कर सकता है जिसके चलते जातक को संतान तथा विशेषतया नर संतान बहुत देर से प्राप्त होती है अथवा उसकी संतान किसी न किसी प्रकार के शारीरिक अथवा मानसिक रोग से पीड़ित हो सकती है।


कुंडली के आठवें घर का पितृ दोष :
कुंडली के आठवें घर में बनने वाला पितृ दोष जातक की आयु पर अशुभ प्रभाव डाल सकता है जिसके कारण इस दोष के प्रभाव में आने वाले जातक सामान्य से कम आयु में ही मृत्यु को प्राप्त हो सकते हैं तथा कुंडली में इस दोष के प्रबल होने की स्थिति में ऐसे जातक कम अथवा युवा आयु में ही किसी दुर्घटना अथवा रोग के कारण अथवा किसी शत्रु द्वारा किये गए आक्रमण के कारण मृत्यु को प्राप्त हो सकते हैं। कुंडली के आठवें घर में स्थित सूर्य तथा अशुभ केतु या मंगल के कारण बनने वाले पितृ दोष के अशुभ प्रभाव के कारण जातक की किसी दुर्घटना में अथवा किसी प्रकार की शल्य चिकित्सा के चलते मृत्यु हो सकती है। इसलिए इस प्रकार के पितृ दोष से पीड़ित जातकों को अपनी आयु तथा स्वास्थ्य को लेकर सदा सावधान रहना चाहिए। कुंडली के आठवें घर का पितृ दोष जातक के वैवाहिक जीवन के लिए भी बहुत अशुभ होता है और इस दोष के प्रभाव में आने वाले अधिकतर जातकों को वैवाहिक जीवन का सुख प्राप्त नहीं हो पाता तथा यह स्थिति तब और भी गंभीर हो जाती है जब कुंडली के आठवें घर में सूर्य तथा अशुभ मंगल की उपस्थिति के कारण इस प्रकार का पितृ दोष बनता हो क्योंकि इस स्थिति में कुंडली के आठवें घर में स्थित अशुभ मंगल इस घर में मांगलिक दोष भी बना सकता है जिसके कारण ऐसे मांगलिक दोष तथा पितृ दोष का संयुक्त प्रभाव जातक के वैवाहिक जीवन तथा उसके सुख को पूरी तरह से नष्ट कर सकता है। इस प्रकार के संयुक्त दोष से पीड़ित कुछ जातकों के एक से अधिक विवाह बहुत कष्टों के बाद टूट सकते हैं जबकि ऐसे कुछ अन्य जातकों का विवाह शारीरिक अथवा मानसिक रूप से विकलांग किसी स्त्री के साथ हो सकता है तथा इस दोष के कुंडली में बहुत प्रबल होने की स्थिति में जातक की स्त्री योजना बना कर जातक की हत्या कर सकती है। इसके अतिरिक्त कुंडली के आठवें घर का पितृ दोष जातक को संतान पैदा करने संबंधी समस्याओं से भी पीड़ित कर सकता है जिसके चलते जातक को संतान तथा विशेषतया नर संतान बहुत देर से प्राप्त होती है अथवा उसकी संतान किसी न किसी प्रकार के शारीरिक अथवा मानसिक रोग से पीड़ित हो सकती है।
कुंडली के नौवें घर का पितृ दोष :
कुंडली के नौवें घर में बनने वाला पितृ दोष निश्चय ही सबसे अशुभ फलदायी पितृ दोष होता है तथा कुंडली का यह एकमात्र ऐसा घर है जहां पर स्थित होकर स्वयम सूर्य भी पितृ दोष बना सकते हैं जिसके कारण कुंडली के नौवें घर में दोहरे पितृ दोष का निर्माण भी हो सकता है। जैसा कि हम जानते हैं कि किसी कुंडली में सूर्य अथवा नौवें घर पर एक या एक से अधिक अशुभ ग्रहों का प्रभाव होने पर कुंडली में पितृ दोष बन जाता है, इसलिए किसी कुंडली के नौवें घर में अशुभ सूर्य के साथ किसी अन्य अशुभ ग्रह के स्थित हो जाने की स्थिति में कुंडली में दोहरा पितृ दोष बन सकता है जिसमें से एक पितृ दोष सूर्य पर उसके साथ स्थित ग्रह के अशुभ प्रभाव के कारण बनता है तथा दूसरा पितृ दोष अशुभ सूर्य के कुंडली के नौवें घर में पड़ने वाले प्रभाव के कारण बन सकता है। इसलिए कुंडली के नौवें घर में बनने वाला पितृ दोष सब प्रकार के पितृ दोषों में सबसे विशेष तथा सबसे अधिक महत्वपूर्ण है और इसलिए इस प्रकार के पितृ दोष का किसी कुंडली में बहुत ध्यानपूर्वक अध्ययन करना चाहिए। कुंडली के नौवें घर का पितृ दोष जातक के जीवन के लगभग हर क्षेत्र में ही अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है जिनमें से एक या दो क्षेत्रों में आने वाली समस्याएं आम तौर पर बहुत गंभीर तथा स्थायी होतीं हैं। उदाहरण के लिए इस प्रकार के पितृ दोष से पीड़ित कुछ जातकों को सारा लगभग सारा जीवन ही बिना किसी व्यवसाय के व्यतीत करना पड़ता है तथा ऐसे जातकों का जीवन निर्वाह दूसरों से मांग मांग कर ही होता है जबकि इस दोष से पीड़ित कुछ अन्य जातकों का सारा जीवन विवाह ही नहीं होता तथा कुछ अन्य जातकों को जीवन भर संतान प्राप्त नहीं होती।


कुंडली के दसवें घर का पितृ दोष :
कुंडली के दसवें घर में बनने वाला पितृ दोष जातक के व्यवसाय के लिए बहुत अशुभ होता है जिसके चलते इस प्रकार के दोष से पीड़ित जातकों को अपने व्यवसायिक क्षेत्रों में अनेक प्रकार की रुकावटों, असफलताओं, षड़यंत्रों तथा हानि आदि का सामना करना पड़ सकता है। दसवें घर के पितृ दोष से पीड़ित कुछ जातक अपने जीवन में बहुत लंबे समय तक कोई व्यवसाय ही नहीं कर पाते अर्थात व्यवसायहीन ही रहते हैं जबकि इस दोष के प्रभाव में आने वाले कुछ अन्य जातकों का व्यवसाय स्थिर नहीं रह पाता तथा इन्हें अपने जीवन में बार बार व्यवसाय बदलना पड़ता है जिसके कारण ऐसे जातक अस्थिर व्यवसाय के कारण अधिक सफल नहीं हो पाते। कुंडली के दसवें घर में बनने वाले पितृ दोष के प्रबल प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को अपने व्यवसाय के माध्यम से बहुत हानि भी उठानी पड़ सकती है जिसके कारण ऐसे जातकों को गंभीर आर्थिक संकट का सामना भी करना पड़ सकता है। दसवें घर का पितृ दोष जातक को अवैध कार्यों में संलग्न होने की प्रबल रुचि भी प्रदान कर सकता है जिसके कारण इस दोष से पीड़ित कुछ जातक अपराधी भी बन सकते हैं तथा अपने अवैध कार्यों के कारण इन जातकों को गंभीर आर्थिक हानि उठानी पड़ सकता है तथा कारावास में भी रहना पड़ सकता है तथा कुंडली में इस दोष का प्रभाव बहुत प्रबल होने पर जातक को अपने किसी गंभीर अपराध के कारण आजीवन कारावास अथवा मृत्यु दंड का सामना भी करना पड़ सकता है। कुंडली के दसवें घर के पितृ दोष के अशुभ प्रभाव में आने वाले जातक अपने अवैध तथा अनैतिक कार्यों के चलते अपनी तथा अपने परिवार की बहुत बदनामी करवा सकते हैं। इसके अतिरिक्त कुंडली के दसवें घर का पितृ दोष जातक को संतान पैदा करने संबंधी समस्याओं से भी पीड़ित कर सकता है जिसके चलते जातक को संतान तथा विशेषतया नर संतान बहुत देर से प्राप्त होती है अथवा उसकी संतान किसी न किसी प्रकार के शारीरिक अथवा मानसिक रोग से पीड़ित हो सकती है।
कुंडली के ग्यारहवें घर का पितृ दोष :
कुंडली के ग्यारहवें घर में बनने वाला पितृ दोष जातक की आर्थिक स्थिति के लिए बहुत अशुभ होता है जिसके चलते इस दोष के प्रभाव में आने वाले बहुत से जातक सारा जीवन अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने में ही व्यतीत कर देते हैं तथा फिर भी इनकी आर्थिक स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं आ पाता। ग्यारहवें घर के पितृ दोष से पीड़ित जातक बहुत परिश्रम करने के पश्चात भी अपना जीवन अच्छे ढंग से चलाने के लिए आवश्यक धन नहीं कमा पाते तथा इन जातकों को लगभग सारा जीवन ही धन की तंगी का सामना करना पड़ता है। समय समय पर ऐसे जातकों को विभिन्न कारणों के चलते धन की हानि भी उठानी पड़ती है जिसके कारण इनकी पहले से ही खराब आर्थिक स्थिति और भी चिंताजनक हो सकती है। कुंडली के ग्यारहवें घर के पितृ दोष के प्रभाव में आने वाले कुछ जातक अपराधी भी बन सकते हैं तथा इनमें से कुछ जातक आरंभ में अवैध कार्यों के माध्यम से बहुत धन भी अर्जित कर सकते हैं किन्तु इनमें से लगभग सभी जातकों को ही बाद में इस सारे धन से हाथ धोना पड़ता है तथा अपने अवैध कार्यों और अपराधों के चलते इनमें से कुछ जातकों को लंबे समय के लिए कारावास भी जाना पड़ सकता है। ग्यारहवें घर के पितृ दोष के प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को जुआ, लाटरी तथा शेयर बाजार जैसे क्षेत्रों में अपना भाग्य आजमाने की आदत भी लग जाती है जिसके कारण इन जातकों को धन की हानि का सामना करना पड़ सकता है हालांकि इनमें से कुछ जातक आरंभ में जुए आदि के माध्यम से धन कमा भी सकते हैं किन्तु शीघ्र ही इनका कमाया हुआ सारा धन तथा इनका अपना धन सबकुछ हानि को प्राप्त हो जाता है। इसलिए इस प्रकार के पितृ दोष से पीड़ित जातकों को जुए, लाटरी आदि जैसी आदतों से दूर रहना चाहिए। इसके अतिरिक्त कुंडली के ग्यारहवें घर का पितृ दोष जातक को संतान पैदा करने संबंधी समस्याओं से भी पीड़ित कर सकता है जिसके चलते जातक को संतान तथा विशेषतया नर संतान बहुत देर से प्राप्त होती है अथवा उसकी संतान किसी न किसी प्रकार के शारीरिक अथवा मानसिक रोग से पीड़ित हो सकती है।


कुंडली के बारहवें घर का पितृ दोष :
कुंडली के बारहवें घर में बनने वाला पितृ दोष जातक के वैवाहिक जीवन में गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है जिसके चलते इस दोष के प्रभाव में आने वाले जातकों का वैवाहिक जीवन कष्टमय ही व्यतीत होता है। यह स्थिति तब और भी गंभीर हो जाती है जब कुंडली के बारहवें घर में बनने वाला यह पितृ दोष सूर्य तथा अशुभ मंगल के बारहवें घर में स्थित होने से बनता हो क्योंकि इस स्थिति में कुंडली के बारहवें घर में पितृ दोष के साथ साथ मांगलिक दोष भी बन सकता है तथा इन दोनों दोषों का संयुक्त प्रभाव जातक के वैवाहिक जीवन को बुरी तरह से विचलित कर सकता है। इस प्रकार के पितृ दोष तथा मांगलिक दोष के संयुक्त प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को विभिन्न कारणों के चलते अपनी पत्नि से बहुत लंबे समय तक अलग रहना पड़ सकता है तथा कई बार तो यह अलगाव सालों लंबा भी हो सकता है। इन दोनों दोषों के संयुक्त प्रभाव के कारण जातक का एक या एक से अधिक विवाह टूट भी सकते हैं तथा ऐसा जातक या उसकी पत्नि किसी अन्य व्यक्ति के प्रेम संबंध में पड़कर अपने जीवन साथी को छोड़कर भी जा सकती है। कुंडली के बारहवें घर का पितृ दोष जातक की आर्थिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव डाल सकता है तथा इस प्रकार के पितृ दोष से पीड़ित जातक को बहुत से अवांछित अथवा अनचाहे स्थानों पर विवशतावश धन खर्च करना पड़ता है जिसके कारण ऐसे जातक की आर्थिक स्थिति पर विपरीत प्रभाव पड़ता है तथा इसी कारणवश इस प्रकार के पितृ दोष से पीड़ित अनेक जातक अपने जीवन में बहुत धन कमाने के पश्चात भी आर्थिक रूप से पीड़ित ही रहते हैं। बारहवें घर का पितृ दोष जातक को जुआ तथा लाटरी आदि जैसी लत भी लगा सकता है जिसके चलते जातक का बहुत सा धन खराब हो जाता है। कुंडली के बारहवें घर के पितृ दोष के प्रबल प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को अपनी इच्छा के विरुद्ध अपने परिवार से बहुत दूर विदेश में बहुत लंबे समय तक रहना पड़ सकता है तथा इनमें से कुछ जातकों की तो मृत्यु भी अपने परिवार से दूर विदेश में ही हो जाती है। इसके अतिरिक्त कुंडली के बारहवें घर का पितृ दोष जातक को संतान पैदा करने संबंधी समस्याओं से भी पीड़ित कर सकता है जिसके चलते जातक को संतान तथा विशेषतया नर संतान बहुत देर से प्राप्त होती है अथवा उसकी संतान किसी न किसी प्रकार के शारीरिक अथवा मानसिक रोग से पीड़ित हो सकती है। इस प्रकार कुंडली के विभिन्न घरों में बनने वाला पितृ दोष जातक के जीवन के भिन्न भिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है। ज्योतिष के अनुसार नवग्रहों में से राजा माने जाने वाले सूर्य हमारी कुंडली में हमारी आत्मा, हमारे पिता, हमारे पूर्वजों, हमारी नर संतान पैदा करने की क्षमता तथा अन्य बहुत सीं महत्वपूर्ण विशेषताओं का प्रदर्शन करते हैं तथा किसी कुंडली में इतने महत्वपूर्ण ग्रह पर अशुभ प्रभाव पड़ने से पितृ दोष जैसे किसी दोष का बनना स्वाभाविक ही है। इसलिए प्रत्येक ज्योतिषी को किसी कुंडली का अध्ययन करते समय कुंडली में पितृ दोष के उपस्थित होने की स्थिति में इस दोष के बल तथा अशुभ प्रभावों का भली प्रकार से निरीक्षण करना चाहिए क्योंकि किसी कुंडली में उपस्थित प्रबल पितृ दोष कुंडली में बनने वाले किसी शुभ योग का प्रभाव बहुत कम कर सकता है तथा कुंडली में पितृ दोष बनने की स्थिति में जातक शुभ योगों के बनने के पश्चात भी इनसे कोई विशेष लाभ तब तक प्राप्त नहीं कर पायेगा जबतक ज्योतिष के उपायों की सहायता से कुंडली में बनने वाले पितृ दोष का निवारण न कर दिया जाए।
 
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