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पित्र दोष - कुंडली के विभिन्न घरों में बनने वाले पित्र दोष के अशुभ प्रभावों के बारे में - Saral Jyotish Upay
 
 
पित्र दोष भारतीय ज्योतिष की एक अति महत्त्वपूर्ण धारणा है तथा इस पर चर्चा किए बिना भारतीय ज्योतिष को अच्छी तरह से समझ पाना संभव नहीं है। वैसे तो भारतीय ज्योतिष में पाए जाने वाले अधिकतर योगों, दोषों एवम धारणाओं केपित्र दोषबारे में तरह-तरह की भ्रांतियां फैली हुईं हैं किन्तु पित्र दोष इन सब से आगे है क्यों कि पित्र दोष के बारे में तो पहली भ्रांति इसके नाम और परिभाषा से ही शुरू हो जाती है। पित्र दोष के बारे में अधिकतर ज्योतिषियों और पंडितों का यह मत है कि पित्र दोष पूर्वजों का श्राप होता है जिसके कारण इससे पीड़ित व्यक्ति जीवन भर तरह-तरह की समस्याओं और परेशानियों से जूझता रहता है तथा बहुत प्रयास करने पर भी उसे जीवन में सफलता नहीं मिलती। इसके निवारण के लिए पीड़ित व्यक्ति को पूर्वजों की पूजा करवाने के लिए कहा जाता है जिससे उसके पित्र उस पर प्रसन्न हो जाएं तथा उसकी परेशानियों को कम कर दें।


ज्योतिष के अनुसार किसी कुंडली में सूर्य अथवा कुंडली के 9वें घर पर एक या एक से अधिक अशुभ ग्रहों का प्रभाव होने पर कुंडली में पितृ दोष का निर्माण हो जाता है जो जातक की कुंडली में इस दोष की स्थिति के आधार पर जातक को उसके जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार के कष्ट दे सकता है। आज के इस लेख में हम पितृ दोष के कुंडली के विभिन्न घरों में उपस्थित होने से जातक को मिलने वाले कुछ संभावित अशुभ फलों के बारे में विचार करेंगे।


कुंडली के पहले घर का पितृ दोष :
किसी कुंडली के पहले घर में स्थित सूर्य पर एक अथवा एक से अधिक अशुभ ग्रहों का प्रभाव होने पर कुंडली के पहले घर में पितृ दोष बन जाता है। कुंडली के पहले घर में बनने वाला पितृ दोष जातक को किसी स्वास्थ्य संबंधित समस्या अथवा किसी रोग से पीड़ित कर सकता है तथा कुंडली में इस प्रकार के पितृ दोष के निर्माण में सूर्य के भी अशुभ होने पर सामान्यतया जातक को कोई न कोई गंभीर रोग लग जाता है जो जातक को उसके जीवन में समय समय पर कष्ट देता रहता है तथा इस प्रकार के पितृ दोष के बहुत प्रबल होने पर ऐसा रोग जातक के लिए प्राण घातक भी सिद्ध हो सकता है। किसी कुंडली के पहले घर में अशुभ सूर्य तथा अशुभ राहु के तुला राशि में स्थित होने से बनने वाला पितृ दोष जातक के लिए बहुत घातक सिद्ध हो सकता है क्योंकि तुला राशि में स्थित होने से सूर्य पहले से ही बलहीन होते हैं और ऐसे बलहीन सूर्य के राहु के अशुभ प्रभाव में आ जाने के कारण कुंडली में प्रबल पितृ दोष बन सकता है। कुंडली के पहले घर का पितृ दोष जातक के वैवाहिक जीवन में भी समस्याएं उत्पन्न कर सकता है तथा ये समस्याएं उस स्थिति में और भी गंभीर हो जाएंगीं यदि ऐसा पितृ दोष कुंडली के पहले घर में स्थित अशुभ मंगल के कारण बनता हो क्योंकि इस स्थिति में कुंडली के पहले घर में स्थित अशुभ मंगल मांगलिक दोष भी बना सकते हैं जिसके कारण जातक को पितृ दोष तथा मांगलिक दोष के संयुक्त अशुभ प्रबाव का सामना करना पड़ेगा। कुंडली के पहले घर का पितृ दोष जातक को व्यवसायिक तथा आर्थिक समस्याओं से भी पीड़ित कर सकता है तथा इस प्रकार के पितृ दोष के प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को लंबे समय के लिए अस्पताल अथवा कारावास में भी रहना पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त कुंडली के पहले घर का पितृ दोष जातक को संतान पैदा करने संबंधी समस्याओं से भी पीड़ित कर सकता है जिसके चलते जातक को संतान तथा विशेषतया नर संतान बहुत देर से प्राप्त होती है अथवा उनकी संतान किसी न किसी प्रकार के शारीरिक अथवा मानसिक रोग से पीड़ित हो सकती है।


कुंडली के दूसरे घर का पितृ दोष :
कुंडली के दूसरे घर में बनने वाला पितृ दोष जातक की आर्थिक स्थिति के लिए बहुत अशुभ फल दे सकता है तथा इस दोष के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातकों का सारा जीवन निर्धनता में ही व्यतीत हो जाता है जिसके चलते इन जातकों को अपने जीवन में बार बार कर्ज लेना पड़ सकता है तथा इनमें से कुछ जातक तो आजीवन कर्ज के नीचे ही रहते हैं। कुंडली के दूसरे घर का पितृ दोष जातक के विवाह तथा वैवाहिक जीवन में विभिन्न प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है तथा किसी कुंडली में इस दोष के बहुत प्रबल होने पर ऐसे जातक के एक या एक सी भी अधिक विवाह टूट सकते हैं। यह संभावनाएं तब और भी बढ़ जातीं हैं जब इस प्रकार का पितृ दोष कुंडली के दूसरे घर में अशुभ सूर्य तथा अशुभ मंगल के योग से बनता हो क्योंकि इस स्थिति में कुंडली के दूसरे घर में उपस्थित अशुभ मंगल मांगलिक दोष भी बना सकता है जिसके चलते ऐसे अशुभ पितृ दोष तथा मांगलिक दोष के संयुक्त प्रभाव में आने वाले जातक के 2, 3 अथवा 4 विवाह भी टूट सकते हैं। कुंडली के दूसरे घर का पितृ दोष जातक की आयु पर भी विपरीत प्रभाव डाल सकता है विशेषतया जब ऐसा पितृ दोष कुंडली के दूसरे घर में सूर्य के साथ अशुभ राहु के स्थित होने से बना हो। इसके अतिरिक्त कुंडली के दूसरे घर का पितृ दोष जातक को संतान पैदा करने संबंधी समस्याओं से भी पीड़ित कर सकता है जिसके चलते जातक को संतान तथा विशेषतया नर संतान बहुत देर से प्राप्त होती है अथवा उसकी संतान किसी न किसी प्रकार के शारीरिक अथवा मानसिक रोग से पीड़ित हो सकती है।


कुंडली के तीसरे घर का पितृ दोष :
कुंडली के तीसरे घर में बनने वाला पितृ दोष जातक के व्यवसायिक क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है जिसके चलते इस दोष के प्रभाव में आने वाले जातकों को अपने व्यवसायिक क्षेत्रों में बहुत सी रुकावटों अथवा असफलताओं का सामना करना पड़ सकता है तथा इनमें से कुछ जातकों को अपना व्यवसाय बार बार बदलना पड़ सकता है तथा इन जातकों को अपने व्यवसाय के बार बार बदलने के कारण बहुत बार भिन्न भिन्न स्थानों की यात्रा भी करनी पड़ सकती है तथा ऐसे जातक सामान्यतया किसी भी एक स्थान अथवा एक व्यवसाय में टिके रहने में सफल नहीं हो पाते। कुंडली के तीसरे घर का पितृ दोष जातक को अवैध तथा अनैतिक कार्यों की ओर भी ले जा सकता है जिसके चलते ऐसे जातक अपराधी बन सकते हैं तथा इनमें से कुछ जातकों को लंबे समय के लिए कारावास में भी रहना पड़ सकता है। इस प्रकार का पितृ दोष जातक के उसके भाई, बहनों, मित्रों तथा रिश्तेदारों के साथ संबंध भी खराब कर सकता है जिसके चलते ऐसे जातकों को अपने भाई, बहनों तथा बहुत से मित्रों से कोई विशेष सहयोग प्राप्त नहीं हो पाता। कुंडली के तीसरे घर का पितृ दोष जातक की आयु पर भी विपरीत प्रभाव डाल सकता है तथा इस योग के प्रबल प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों की अपेक्षाकृत कम आयु में ही किसी दुर्घटना आदि के कारण मृत्यु हो सकती है अथवा ऐसे कुछ जातकों की अपने शत्रुओं द्वारा किये गये आक्रमण में अथवा पुलिस के साथ मुठभेड़ में भी मृत्यु हो सकती है। इसके अतिरिक्त कुंडली के तीसरे घर का पितृ दोष जातक को संतान पैदा करने संबंधी समस्याओं से भी पीड़ित कर सकता है जिसके चलते जातक को संतान तथा विशेषतया नर संतान बहुत देर से प्राप्त होती है अथवा उसकी संतान किसी न किसी प्रकार के शारीरिक अथवा मानसिक रोग से पीड़ित हो सकती है।


कुंडली के चौथे घर का पितृ दोष :
कुंडली के चौथे घर में बनने वाला पितृ दोष जातक को विभिन्न प्रकार के रोगों से तथा विशेषतया मानसिक रोगों से पीड़ित कर सकता है। किसी कुंडली के चौथे घर में सूर्य तथा अशुभ राहु अथवा केतु के स्थित होने से बनने वाला पितृ दोष जातक को गंभीर मानसिक रोगों से पीड़ित कर सकता है जिसके चलते ऐसे जातक को लंबे समय के लिए किसी मानसिक रोगों के अस्पताल में भी रहना पड़ सकता है। कुंडली के चौथे घर का पितृ दोष जातक के वैवाहिक जीवन में भी समस्याएं पैदा कर सकता है विशेषतया तब जब इस प्रकार का पितृ दोष कुंडली के चौथे घर में अशुभ सूर्य तथा अशुभ मंगल के योग से बनता हो क्योंकि इस स्थिति में कुंडली के चौथे घर में उपस्थित अशुभ मंगल मांगलिक दोष भी बना सकता है जिसके चलते ऐसे अशुभ पितृ दोष तथा मांगलिक दोष के संयुक्त प्रभाव में आने वाले जातक के वैवाहिक जीवन में गंभीर समस्याएं आ सकतीं हैं। कुंडली के चौथे घर का पितृ दोष जातक के व्यवसायिक क्षेत्र में भी समस्याएं पैदा कर सकता है जिसके कारण इस दोष के प्रभाव में आने वाले जातक को अपने व्यवसाय के बार बार बदलने के कारण अपने रहने के स्थान को भी बार बार बदलना पड़ सकता है जिसके चलते ऐसे जातक के मानसिक स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। कुंडली के चौथे घर का पितृ दोष जातक को उसकी माता से संबंधित समस्याओं से भी पीड़ित कर सकता है जैसे कि इस प्रकार के पितृ दोष से पीड़ित कुछ जातकों को बचपन में अपनी माता का स्नेह किसी न किसी कारण के चलते मिल नहीं पाता तथा इनमें से कुछ जातकों को अपने बचपन में बहुत सा समय अपनी माता से अलग रहना पड़ सकता है तथा इस दोष के बहुत प्रबल होने की स्थिति में जातक की माता की मृत्यु जातक के बचपन में ही हो जाती है जिसके कारण जातक को आजीवन माता के स्नेह से वंचित रहना पड़ता है। इसके अतिरिक्त कुंडली के चौथे घर का पितृ दोष जातक को संतान पैदा करने संबंधी समस्याओं से भी पीड़ित कर सकता है जिसके चलते जातक को संतान तथा विशेषतया नर संतान बहुत देर से प्राप्त होती है अथवा उसकी संतान किसी न किसी प्रकार के शारीरिक अथवा मानसिक रोग से पीड़ित हो सकती है।


कुंडली के पांचवें घर का पितृ दोष :
कुंडली के पांचवें घर में बनने वाला पितृ दोष जातक को संतान पैदा करने से संबंधित समस्याओं से पीड़ित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के पितृ दोष से पीड़ित जातकों को संतान सुख प्राप्त करने के लिए बहुत लंबे समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है तथा इनमें से कुछ जातकों को लंबी चिकित्सा या उपचार के पश्चात ही संतान प्राप्त हो पाती है। इस प्रकार के पितृ दोष के प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को सारा जीवन संतान प्राप्त नहीं हो पाती जबकि ऐसे कुछ अन्य जातक ऐसी संतान को जन्म दे सकते हैं जो शारीरिक अथवा मानसिक रूप से विकलांग हो। स्त्रियों की कुंडलियों में इस प्रकार का पितृ दोष संतान पैदा करने से संबंधित और भी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है जिसके चलते कुंडली के पांचवे घर के पितृ दोष के अशुभ प्रभाव में आने वालीं कुछ स्त्रियों को संतान प्राप्ति के लिए लंबे समय तक चिकित्सा या उपचार करवाना पड़ सकता है तथा इनमें से कुछ स्त्रियों का बच्चा गर्भ में ही मर सकता है जबकि कुछ अन्य स्त्रियों का बच्चा जन्म लेते ही मर सकता है। किसी स्त्री की कुंडली में इस दोष का प्रभाव बहुत प्रबल होने पर बच्चे को जन्म देते समय ऐसी स्त्री अथवा उसके बच्चे अथवा दोनों की ही मृत्यु हो सकती है। ऐसा विशेषतया तब देखने को मिल सकता है जब ऐसा पितृ दोष कुंडली के पांचवें घर में अशुभ सूर्य के साथ अशुभ राहु, केतु अथवा शनि के स्थित होने से बनता हो। कुंडली के पांचवें घर का पितृ दोष जातक की शिक्षा तथा विशेषतया उच्च शिक्षा में भी रुकावटें डाल सकता है या फिर ऐसी उच्च शिक्षा जातक के कोई विशेष काम नहीं आ पाती जिसके कारण इस दोष से पीड़ित कुछ जातकों की उच्च शिक्षा किसी न किसी कारणवश अपूर्ण अर्थात अधूरी ही रह जाती है जबकि कुछ अन्य जातकों को पूरी उच्च शिक्षा प्राप्त होने के पश्चात भी ऐसी शिक्षा उनके व्यवसाय में कुछ विशेष काम नहीं आ पाती तथा इन जातकों को ऐसे व्यवसायिक क्षेत्रों में काम करना पड़ता है जो इनकी शैक्षिक योग्यता से बहुत भिन्न अथवा एकदम ही विपरीत हों। कुंडली के पांचवें घर का पितृ दोष जातक को आर्थिक समस्याओं, पारिवारिक समस्याओं तथा अन्य कई प्रकार की समस्याओं से भी पीड़ित कर सकता है।


कुंडली के छठे घर का पितृ दोष :
कुंडली के छठे घर में बनने वाला पितृ दोष जातक को विभिन्न प्रकार के रोगों से पीड़ित कर सकता है जिसके कारण ऐसे जातक को अपने जीवन में इन रोगों के कारण बहुत शारीरिक तथा मानसिक यातना सहन करनी पड़ सकती है तथा इन रोगों के उपचार में जातक का बहुत अधिक धन भी व्यय हो सकता है जिससे जातक की आर्थिक स्थिति पर भी विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। किसी कुंडली के छठे घर में सूर्य तथा अशुभ राहु, केतु अथवा शनि के स्थित होने से बनने वाला पितृ दोष जातक को कैंसर आदि जैसे गंभीर तथा प्राण घातक रोगों से पीड़ित कर सकता है जिसके चलते ऐसे जातक का अधिकतर जीवन कष्टमय ही होता है तथा ऐसे रोग लंबे समय तक जातक को पीड़ा पहुंचाने के पश्चात उसके प्राण भी ले लेते हैं। कुंडली के छठे घर का पितृ दोष जातक को पुलिस अथवा न्यायालय के माध्यम से आने वालीं समस्याओं से भी पीड़ित कर सकता है जिसके चलते इस दोष से पीड़ित जातकों को न्यायालय के निर्णय के कारण आर्थिक हानि उठानी पड़ सकती है अथवा लंबे समय के लिए कारावास में भी रहना पड़ सकता है। कुछ स्थितियों में इस प्रकार के पितृ दोष से पीड़ित जातकों को बिना किसी अपराध के भी हानि उठानी पड़ सकती है अथवा कारावास जाना पड़ सकता है जबकि कुछ अन्य स्थितियों में ऐसे जातकों को किसी अवैध कार्य में संलग्न होने के कारण कारावास जाना पड़ सकता है क्योंकि इस प्रकार के पितृ दोष से पीड़ित जातकों के अपराधी बनने की संभावना भी रहती है। कुंडली के छठे घर का पितृ दोष जातक की आर्थिक स्थिति पर भी बहुत अशुभ प्रभाव डाल सकता है जिसके कारण ऐसे जातकों की आर्थिक स्थिति शोचनीय अथवा बहुत शोचनीय रहती है तथा इन जातकों को जीवन में अनेक बार आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है तथा दूसरों से धन लेकर निर्वाह करना पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त कुंडली के छठे घर का पितृ दोष जातक को संतान पैदा करने संबंधी समस्याओं से भी पीड़ित कर सकता है जिसके चलते जातक को संतान तथा विशेषतया नर संतान बहुत देर से प्राप्त होती है अथवा उसकी संतान किसी न किसी प्रकार के शारीरिक अथवा मानसिक रोग से पीड़ित हो सकती है।
 
 
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